Skip to main content

Posts

Showing posts with the label spirituality

आव्हान हो रहा हैं!

मैं आव्हान करता हूं, उन युवाओं का जिनके रक्त में देश भक्ति का ज्वालामुखी फूट रहा है। जिनके प्राण मातृभूमि की सेवा लिए तत्पर है। मैं आव्हान करता हूं उन सुपतो का जिनका कण कण समर्पित हैं। मैं आव्हान करता हूं जिनके भीतर ऊर्जा सा प्राण दौड़ रहा है! हो रहा है आव्हान युगपुरुष का, भारत की धरा पर प्राकट्य हो उस युग पुरुष का! धन्य है वह भारत की माटी जहां का कण कण राम है, यह का हर एक युवा प्रचंड पुरुषार्थी है। युवाओं के संप्रेरक, भारतीय संस्कृति के अग्रदूत, विश्वधर्म के उद्घोषक, व्यावहारिक वेदांत के प्रणेता, वैज्ञानिक अध्यात्म के भविष्यद्रष्टा युगनायक भारत के अनेक युगपुरुष, गुरु जिनको शरीर त्यागे सौ वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन उनका हिमालय-सा उत्तुंग व्यक्तित्व आज भी युगाकाश पर जाज्वल्यमान सूर्य की भाँति प्रकाशमान है। उनका जीवन दर्शन आज भी उतना ही उत्प्रेरक एवं प्रभावी है, जितना सौ वर्ष पूर्व था, बल्कि उससे भी अधिक प्रासंगिक बन गया है। तब राजनीतिक पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ी माँ भारती की दोन-दुर्बल संतानों को इस योद्धा संन्यासी स्वामी विवेकानंद की हुंकार ने अपनी कालजयी संस्कृत...

आध्यात्म से आत्मविस्तार

ज्ञान कर्म और उपासना, व्यक्ति इन तीनों से कभी भी खाली नहीं रहता। इन तीनों को शुद्ध बनाएं। तभी आपका इस जीवन का भविष्य तथा अगले जन्मों का भविष्य सुखदायक होगा। कर्मों का फल बहुत जटिल विषय है। बड़े-बड़े विद्वान इस विषय को ठीक से समझ नहीं पाते। ऋषियों ने वेदों का गहराई से अध्ययन किया, चिंतन मनन किया, और कर्मफल के विषय में कुछ बातें सबके सामने प्रस्तुत की। उनके अनुसार यह सार है, कि जो भी व्यक्ति, जो भी कर्म करता है, उसको उसका फल अवश्य ही भोगना पड़ता है। फल भोगने में कोई भी छुटकारा नहीं है। जैसे बिजली की तार छूने से करंट लगता है। इसमें एक बार भी माफी नहीं होती। ऐसे ही कर्म फल में, ईश्वर के कानून में, कहीं भी कोई भी माफी नहीं होती।थोड़े कर्म का थोड़ा फल। अधिक कर्म का अधिक फल। अच्छे कर्म का अच्छा फल। बुरे कर्म का बुरा फल, मिलता अवश्य है। अपने सही समय पर मिलता है। किस कर्म का फल कब कहां क्या और कैसे देना, इसका निर्धारण ईश्वर करता है। क्योंकि वही इस विषय को ठीक प्रकार से जानता है, और कर्मफल देने में समर्थ भी है।          जैसा कि ऊपर कहा है, उसके अनुसार ईश्वर की...

The Bhagvat Gita wisdom

"ऐसी दशा जब आपको नकारात्मकता के अलावा और कुछ दिखे ही नहीं। एक स्थिती जब आपको अंधेरा जकड़ लेवे। कोई मार्ग नही दिखे तो, गुरुरूप श्रीमद्भगवद्गीता का आव्हान ही जीवन को सफल दिशा निर्देश दिखाएगा। गीता जी हमे दीपक की प्रेरणा देती है।" एक तेजस्वी किरण जो आपको अर्जुन बनने का मौका प्रदान करती हैं। तभी समझ लेना ईश्वर आपके साथ है। आप अकेले नहीं हो, सर्वशक्तीमान सत्ता निरन्तर आपके साथ है। आज जगत में अनेक किताबे, काव्य, ग्रंथ तत्वज्ञान, महाकाव्य, धर्मग्रंथ इन्ही सब ग्रंथो मे ज्ञानविज्ञान की संपदा और सौंदर्य का बखान भरा पड़ा हुआ है। इन दिव्य साहित्य के सुमेरू पर्वत श्रृंखला मे शिर्षस्थ स्थान श्रीमद्भागवतगीता का ही है। श्रीगीता जी के नाम से और भी धर्मग्रंथ है, जो भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा श्रीगीताजी के बाद हुए है। जैसे की अपने परम मित्र उद्धव को विनंती के अनुसार स्वयं भगवान में बताई हुई "उद्धव गीता"।अखंड प्रतिज्ञा धारी महात्मा भिष्मजी के आग्रहस्तव "भीष्म गीता"। और अर्जुन के अनुरोध पर बताई हुई "अनुगीता"। जड़ और स्थूल दृष्टी से देखा जाए तो यह सब चीजों क...

श्वास के साथ जीना सिखना होगा !!

मनुष्य के शरीर का विज्ञान अदभूत हैं। मनुष्य के शरीर का हर एक अवयव अपने योग्य स्थान पर अपना कार्य सुचारू रूप से करता है। मानव शरीर यह वह मशीन है, जो आपका हर समय में आपका साथ निभाती है। हमारे शरीर के प्रत्येक क्रिया का वैज्ञानिक आधार होती है।अगर शरीर पर कुछ घाव हो जाए तो शरीर अपने आप उस घाव को ठीक करता है। शरीर में अशुद्धि जमा होने पर उस टॉक्सिन को शरीर के बाहर निकले की क्रिया भी अपने आप शरीर करता है। इंटेलेंजेंस का खज़ाना है, मानव शरीर। हमे ध्यान देकर प्रत्येक क्रिया को समझना है। पूर्ण स्वस्थता को प्राप्त होना हमारा मूल कर्तव्य है। स्वास्थ को आकर्षित किया जाए तो हमे स्वास्थ निरोगी होने से कोई नही रोक सकता। मनुष्य शरीर इस अखिल ब्रह्माण्ड का छोटा स्वरूप है। इस शरीर रूपी काया को व्यापक प्रकृति की अनुकृति कहा गया है। विराट् का वैभव इस पिण्ड के अन्तर्गत बीज रूप में प्रसुप्त स्थिति में विद्यमान है। कषाय-कल्मषों का आवरण चढ़ जाने से उसे नर पशु की तरह जीवनयापन करना पड़ता है। यदि संयम और निग्रह के आधार पर इसे पवित्र और प्रखर बनाया जा सके, तो इसी को ऋद्धि-सिद्धियों से ओत-प्रोत किया जा...

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि

भारत की वह अनोखी धरती जिसका स्वयं सुर्य परिचय देता हों। जिसका बहता हुआ जल भी किसी कवि की प्रेरणा बनता हो, जहां उगता हर अन्न का कण ऊर्जा का रोम रोम में देश भक्ति का संचार कराता हो। भारत की भूमि शौर्य का परिचय देती है, तो विशाल हृदय का दर्शन कराती है। भारत को जानना हैं, तो भारत के आध्यात्म के ज्ञान को आत्मसात् करना होगा। तब जाकर आप भारत को समझ पाएंगे। भारत केवल देश नहीं अपितु जीवन जीने तरीका है, जो मानव निर्माण का कार्य करता है, योग का संदेश देकर समस्त संसार को मार्ग दिखाने का कार्य करता है। भारत जगद्गुरू है। भारत को गुरू की नजरिया से देखने का प्रयास तो करो! अपने जीवन की समस्या का सुलझते पाएंगे। भारत की वह दिव्य ज्ञान गाथा हमे बोध कराती है, अनंत की शक्ति का। वह भारत भूमि जिसकी धरा पर निरंतर ब्रम्ह अवतरण का प्राकट्य होता हो। भारत को समझना और गर्व करना किसी दिव्य अनुभूति से कम नहीं है। जहां की सत्ता राम की उपासक हो, वेद जहां पूजे जातें हो, गुरुकुलो की शिक्षा अपने आप में स्वयं का बोध कराती हो, यह स्वरुप भारत माता हो। आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर हमे भारत की पहचान उसे लौ...

सूर्य रश्मि चिकित्सा एवं विज्ञान।

सूर्य का महत्त्व समझाने के लिए हमारे धर्म ग्रंथों में अनादि काल से वर्णन है। परंतु एक बात पक्की है कि यह हमें प्राचीन समय से अपनी ओर आकर्षित करता आया है। हम पिछले युगों में जाएँ या आज के युग की बात करें, सूर्य हमेशा जीवनदायिनी ऊर्जा देता आया है। सूर्य के बारे में जानने के लिए आज का वैज्ञानिक दिन-रात एक कर रहे हैं, जबकि हमारे ऋषि-मुनि इसकी दिव्यता और उसका उपयोग करना भी जानते थे। सूर्य मात्र हमारे शरीर को ही नहीं हमारे सूक्ष्म शरीर को भी अपनी चैतन्य शक्ति से जीवंतता प्रदान करता है। वैज्ञानिक इसे आग का गोला कहें अथवा कोई ग्रह परंतु प्राचीन काल में ही इसके अनेक रहस्यों को हमारे मनीषियों ने समझ लिया था और उसका उपयोग करने की कला को जन-कल्याण तक पहुँचाया था परंतु अब सूर्य का ज्ञान लुप्तप्राय है। यहाँ पर हम थोड़ी सी चर्चा सूर्य के रहस्य को समझाने के लिए करना चाहते हैं, ताकि हम जब सूर्य नमस्कार करें तो हमारे मन में श्रद्धा, लगन और आस्था प्रकट हो और हम उससे लाभान्वित हो सकें। बनारस में एक बहुत बड़े संत हुए हैं।   जिनका नाम था स्वामी विशुद्धानंद परमहंस और उनके शिष्य थे काशी हिंदू ...

आध्यात्मिक परिष्कार !!

हमारा एक पल कुछ ही देर में मिनटों का स्वरूप ले लेता है। मिनटों से घंटो का, वही घंटे दिन और रात में परिवर्तित हो जाते है। दिन और रातों का यह समय साल बनकर उभर कर आता हैं। कुछ साल बीतते है, वह आयुष्य का रूप साकार करने लगते हैं। मानव का आयुष्य काल चक्र में बंधा हुआ है। कल यही नियम परिवर्तन है।मानव जाति विनाश की ओर अग्रसर हो रही है। मानव जीवन एक व्यस्त रोगी सा प्रतित होता नजर आता है। यह विश्व की सुन्दर रचना सर्व शक्तिमान प्रभु ने की हैं। वही हमारा निर्माता है तो विनाश कर्ता भी वही है। हमे समझना है, मानव का अस्तित्व क्या है? मनुष्य जन्म का प्रयोजन क्या है? किसी वस्तु के संबंध में विचार करने के लिए यह आवश्यक है। कि उसकी कोई मूर्ति हमारे मनःक्षेत्र में हो। बिना कोई प्रतिमूर्ति बनाये मन के लिए किसी भी विषय में सोचना असम्भव है। मन की प्रक्रिया ही यही है कि पहले वह किसी वस्तु का आकार निर्धारित कर लेता है, तब उसके बारे में कल्पना शक्ति काम करती है। समुद्र भले ही किसी ने न देखा हो, पर जब समुद्र के बारे में कुछ सोच-विचार किया जाएगा, तब एक बड़े जलाशय की प्रतिमूर्ति मनःक्षेत्र में अवश्य रह...

Learn to talk with myself !

There is only one way to know the conscience that it is always curious and conscious about it. The more curiosity and consciousness in which the more curious and conscious, it makes a deep search about it and certainly finds him one day. You should be more and more curious and conscious about your soul. You will be familiar with your soul, listen to her speech, you will be free from ignorance and will be the official of peace in life. The curiosity of the conscience should practice listening to the sound of the conscience on behalf of the mind. The body's lust seems to be very dear to your worthy time, but their cord is so odd that, do not solve.  The family of problems arising from trash is more than that. Take the money, it is necessary, because your dependents can run properly. It should be done by satisfying as much as possible, and the remaining powers should be applied to the immunity, Parmarth. But who does it? Everyone's Havish ran from lakh to lakh to milli...