मैं आव्हान करता हूं, उन युवाओं का जिनके रक्त में देश भक्ति का ज्वालामुखी फूट रहा है। जिनके प्राण मातृभूमि की सेवा लिए तत्पर है। मैं आव्हान करता हूं उन सुपतो का जिनका कण कण समर्पित हैं। मैं आव्हान करता हूं जिनके भीतर ऊर्जा सा प्राण दौड़ रहा है! हो रहा है आव्हान युगपुरुष का, भारत की धरा पर प्राकट्य हो उस युग पुरुष का! धन्य है वह भारत की माटी जहां का कण कण राम है, यह का हर एक युवा प्रचंड पुरुषार्थी है। युवाओं के संप्रेरक, भारतीय संस्कृति के अग्रदूत, विश्वधर्म के उद्घोषक, व्यावहारिक वेदांत के प्रणेता, वैज्ञानिक अध्यात्म के भविष्यद्रष्टा युगनायक भारत के अनेक युगपुरुष, गुरु जिनको शरीर त्यागे सौ वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन उनका हिमालय-सा उत्तुंग व्यक्तित्व आज भी युगाकाश पर जाज्वल्यमान सूर्य की भाँति प्रकाशमान है। उनका जीवन दर्शन आज भी उतना ही उत्प्रेरक एवं प्रभावी है, जितना सौ वर्ष पूर्व था, बल्कि उससे भी अधिक प्रासंगिक बन गया है। तब राजनीतिक पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ी माँ भारती की दोन-दुर्बल संतानों को इस योद्धा संन्यासी स्वामी विवेकानंद की हुंकार ने अपनी कालजयी संस्कृत...
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