कुण्डलिनी स्वयं में एक ऐसी शक्ति है जिसका वर्णन करने के लिए प्राचीन एवं अर्वाचीन विद्वानों ने अपने देश काल एवं परिस्थिति के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के निकटतम रूपक में प्रयोग किये हैं। कहीं कुण्डलिनी को नारी-पुरूष की सम्मिलित सत्ता का रूप देने के लिए अर्द्धनारीश्वर भगवान की कल्पना की गई है तो कहीं उसकी सर्प वृत्ति का ध्यान करके "साढ़े तीन कुण्डली मारे सर्प" को संज्ञा दी गयी है। आज के परिप्रेक्ष्य में हम इसे विद्युत शक्ति के समान ही एक शक्ति मान सकते हैं। विद्युत शक्ति हीटर में लगा देने पर गर्मी, कूलर में लगा देने से ठंडक, टी.वी. में चलचित्र, रेडियों में गाना, रोगी में स्वास्थ्य आदि देती है तात्पर्य यह है कि शक्ति एक ही है वह अलग-अलग विधि से प्रयोग करने पर अलग-अलग कार्य सम्पन्न कर सकती है। इस प्रकार कुण्डलिनी शक्ति को भी विभिन्न प्रकार के सात्विक, राजसिक और तामसिक कार्यो के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। कुण्डलिनी जागरण का अर्थ है अपने अंदर छिपे पड़े प्राणशक्ति के भण्डार का योग साधना के माध्यम से स्फोट प्रक्रिया द्वारा रहस्योद्घाटन आत्म कल्याण एवं लोक कल्याण के निम...
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