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आरोग्यं मंत्र।

आंवला मनुष्य जाति को मिला हुआ कल्पवृक्ष है। आवला का यह बहुगुणी वृक्ष परमेश्वर ने मानव को स्वस्थ रखने के लिए निर्माण किया है। और कुष्मांड (पेठा) अनेक औषधि गुणो से युक्त है। भारतीय संस्कृती में माँ प्रकृती को धन्यवाद करने की प्रथा है, जिसमे वह त्योहार रूपो में मनाया जाता है। जैसा की आप जानते है की, भारतीय संस्कृती मे वृक्षो का अनन्य साधारण महत्व रहा है। सदियों से वृक्षों की पुजा की जाती। क्योकी, निर्जिव वस्तुओं से अन्न (भोजन) कैसे तैयार किया जाता? यह रहस्य केवल वृक्षो को ही पता है। हम बाहर के विज्ञान को कितना ही जानते है, पर कुछ बातो पर अभी भी पड़दा है। वह रहस्य है। साधारण मिटट्टी, कुछ खाद, सुर्यप्रकाश इन सब चिजे मिलाकर वनस्पती अपना उत्पाद बनाते है। जैसे आम, चावल, गेहूं जैसे अप्रतिम पदार्थ तैयार करती है। इस गूढ़ रहस्य का विज्ञान वृक्ष, वनस्पती और माँ प्रकृती ही जाने। वनस्पती सृष्टी ही प्रथम अस्तित्व की धरोहर है। हमारे पूर्वज पीढ़ी का पुराना अस्तित्व है। पर उन सबकी जड़े एक ही वंशवृक्ष तक पहुंचती है। इस तथ्य को हमे समझना है। इसी कारण से वृक्षों की पूजा अर्चना कि जाती है। हमारी...

सूर्य रश्मि चिकित्सा एवं विज्ञान।

सूर्य का महत्त्व समझाने के लिए हमारे धर्म ग्रंथों में अनादि काल से वर्णन है। परंतु एक बात पक्की है कि यह हमें प्राचीन समय से अपनी ओर आकर्षित करता आया है। हम पिछले युगों में जाएँ या आज के युग की बात करें, सूर्य हमेशा जीवनदायिनी ऊर्जा देता आया है। सूर्य के बारे में जानने के लिए आज का वैज्ञानिक दिन-रात एक कर रहे हैं, जबकि हमारे ऋषि-मुनि इसकी दिव्यता और उसका उपयोग करना भी जानते थे। सूर्य मात्र हमारे शरीर को ही नहीं हमारे सूक्ष्म शरीर को भी अपनी चैतन्य शक्ति से जीवंतता प्रदान करता है। वैज्ञानिक इसे आग का गोला कहें अथवा कोई ग्रह परंतु प्राचीन काल में ही इसके अनेक रहस्यों को हमारे मनीषियों ने समझ लिया था और उसका उपयोग करने की कला को जन-कल्याण तक पहुँचाया था परंतु अब सूर्य का ज्ञान लुप्तप्राय है। यहाँ पर हम थोड़ी सी चर्चा सूर्य के रहस्य को समझाने के लिए करना चाहते हैं, ताकि हम जब सूर्य नमस्कार करें तो हमारे मन में श्रद्धा, लगन और आस्था प्रकट हो और हम उससे लाभान्वित हो सकें। बनारस में एक बहुत बड़े संत हुए हैं।   जिनका नाम था स्वामी विशुद्धानंद परमहंस और उनके शिष्य थे काशी हिंदू ...